भारतीय सिनेमा में हॉरर शैलियाँ समय-समय पर दर्शकों को आकर्षित करती रही हैं। 'तुम्बाड' जैसे फ़िल्में अपने अनोखे कथानक और दृश्यात्मक अनुभव के लिए पहचानी जाती हैं, जो भारतीय लोककथाओं से प्रेरित हैं। यह फ़िल्म न केवल डर को उजागर करती है, बल्कि अपने गहरे सांस्कृतिक संदर्भों के माध्यम से एक विशेष अनुभव भी प्रदान करती है। वहीं, 'भूल भुलैया' ने अपने अनूठे मिश्रण के साथ कॉमेडी और हॉरर का एक नया आयाम प्रस्तुत किया। इस फ़िल्म ने दर्शकों को न केवल डराया, बल्कि हंसाने का भी काम किया।







